राजधानी एक्सप्रेस यात्रा अनुभव : AC फर्स्ट क्लास में क्या सच में उतनी सुविधा मिलती है जितनी महंगी उसकी टिकट है?
मैंने अभी तक दो बार ए.सी.-1 में यात्रा की है और ये दोनों हीं यात्राएं सिर्फ राजधानी एक्सप्रेस से की है। अतः मैं अपने राजधानी एक्सप्रेस की यात्रा के दौरान हुए अनुभव को साझा कर रहा हूं। इस यात्रा से पहले मैंने पंजाब से दिल्ली तक सचखंड के थर्ड एसी का सफर किया जो कि राजधानी से बहुत ही सस्ता है। इसका जिक्र इसलिए भी करना पड़ रहा है आगे क्लियर हो जाएगा।
मैंने अब तक 2 बार दिल्ली से भोपाल का सफर किया लेकिन सच कहूं तो जितना अंतर एसी-3 और एसी-2 में होता है लगभग उतना हीं अंतर एसी-2 और एसी-1 में भी होता है।
सीट्स ज्यादा चौड़ी होती हैं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऊपर वाली बर्थ पर जाने की लिए दोनो तरफ़ साइड में छोटी सी सीढियां भी बनी होती हैं।
जहां तक सुविधा की बात है तो यात्रियों को जहां एसी-3 और एसी-2 में दिए गए स्नैक्स, नास्ते या लंच अथवा डिनर से काम चलाना पड़ता है वही एसी-1 में इसकी कोई सीमा नही होती। यात्री अपनी जरूरत के अनुसार ज्यादा खाना मसलन चिकन, एग करी तथा सब्जी, चावल और चपाती तथा सूप इत्यादि मांग सकते हैं। वहीं खाने में भी अपने पसंद के खाने को जैसे पास्ता या नूडल इत्यादि उनकी उपलब्ध्ता के अनुसार मांगा जा सकता है। जो वेटर सर्व करने आते हैं वो भी ज्यादा अदब और इज्जत से पेश आते हैं।
आपको इस बात का एहसास हो जाता है कि आप विशेष हैं। अगर कोई कपल यात्रा कर रहा है और उन्हें पहला या अंतिम केबिन मिल जाता है - जिसमे केवल 2 बर्थ, अपर और लोवर होते हैं, तब प्राइवेसी के हिसाब से पैसा वसूल सफर माना जायेगा।
लेकिन अगर किराये की बात करें तो किसी भी एसी-1 कोच में बर्थ की संख्या कम होती है इसलिए रेलवे के मुनाफे में बहुत फर्क नही पड़ता, भले हीं आप एसी-3 में यात्रा करें या एसी-1 में।कुल मिलाकर बात इतनी है कि क्या एक अटेंडेंट की गलती समझी जाए जिसके कारण मेरा बाकी अनुभव इतना अच्छा होने के बाद मन में एक कमी खली या कुछ और चलो जो मेरा अनुभव था आपसे सांझा किया।
एक एक्सपीरियंस यह भी
हांलांकि यह सुविधा सचखंड या अन्य ट्रेनों में नहीं है फिर भी एक बात जो सचखंड की अच्छी लगी जिसे मैं बिना सांझा किए बिना नहीं रह सकता। एक तो ट्रेन नांदेड़ साहिब के लिए जा रहा होता है उसमें वहां दर्शन के लिए जा रहे यात्रियों को गुरु का लंगर मिलता ही मिलता है जिसका एक्सपीरियंस जिसने किया हो वही बता सकता है। इसके लिए शब्द कम पड़ते हैं। दूसरी बात जो मैंने अनुभव किया रात को अटेंडेंट से मैंने दो पिल्लो (सिरहाने) की मांग की उसने खुशी-खुशी सर्व किया। इससे मैंने प्रभावित हुए नहीं रह सका लेकिन तब जब यही पिल्लो और एक एक्ट्रा शीट कवर की डिमांड मैंने राजधानी में की तो उसका अटेंडेंट ने बिल्कुल ही मना कर दिया। मेरी डिमांड बिल्कुल जायज थी कारण उसका एसी बहुत कुलिंग कर रहा था और मैं वहां कंफर्ट नहीं था लेकिन वे समझ नहीं पाए। फिर क्या था मैंने भी जुगाड़ लगाया, मरता क्या न करता। मैंने भी बिना बताए दूसरे वर्थ से एक्ट्रा पिल्लो व शीट कवर ले लिया और बताया नहीं। थोड़ी ही देर में अटेंडेंट वहां पर ढूंढता हुआ पाया।अगर आपके पास भी कोई यात्रा अनुभव है और शेयर करना चाहे तो लोगों के साथ शेयर करने लिए हमें भेज दे उसे ब्लॉक पर प्रकाशित किया जाएगा।






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