26 जनवरी 2019 वैसे तो मैं जालंधर से हूं, पंजाब के सटे होने के कारण मेरा अक्सर यहां घूमने-फिरने जाने होता रहता है लेकिन इस बार का टूअर बहुत ही यादगार रहा, हम तीन दोस्तों ने अपनी यात्रा के दौरान खूब मजे किए। यात्रा की शुरूआत हमने अपने होम टाउन जालंधर से की लेकिन रास्ते में ही पठानकोट से लगभग 20 किलोमीटर के दूसरी पर स्थित पुरथू (मिनी गोवा) के नाम से विख्यात डैम के ऊपर नव निर्मित अटल सेतू पुल को देखने का मन बना और हम पहुंच गए वहां का नजारा देखने का अहसास शब्दों में बयां करना मुश्किल है वहां जाने के बाद ही इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
डलहौजी हिमाचल प्रदेश की गोद में बसा एक छोटा सा शहर हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए स्वर्ग के सामान है। यह पुराने विश्व आकर्षण का प्रतीक है, जो अपने प्राकृतिक परिदृश्य, पाइन-क्लैड घाटियों, फूलों, घास के मैदान, तेज प्रवाह वाली नदियों, शानदार धुंध के पहाड़ से हर किसी को अपनी ओर खींचता है। यहां स्कॉटिश और विक्टोरियन वास्तुकला की हवा की महक और परिवेश आपको ब्रिटिश काल की याद दिलाएगा। डलहौज़ी हिमांचल प्रदेश की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली जगहों में से एक है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है। यह हिल स्टेशन गर्मियों के समय अंग्रेजों के सबसे पसंदीदा स्थानों में से एक था, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में राजसी विक्टोरियन शैली दिखाई देती है। डलहौजी देश के भीड़ वाले शहरों से दूर अपनी तरह का एक विचित्र शहर है जो आपको प्रकृति की गोद में होने का अनुभव करवाता है और एक प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करता है।
पुरथू (मिनी गोवा)
अगर आप हिमाचल प्रदेश या इसके आसपास की जगहों की यात्रा करने जा रहे हैं तो आपको इस प्राकृतिक सुंदरता वाले शहर डलहौजी और इसके आसपास की जगहों की यात्रा जरुर करना चाहिए। डलहौजी शहर 1854 में वाइसराय- लॉर्ड डलहौजी द्वारा स्थापित किया गया था, जो अंग्रेजो की गर्मी से बचने की खास जगह थी। यहां की शांतिपूर्ण जलवायु और सुखद मौसम होने की जगह से यह अंग्रेजों के लिए छुट्टी का स्थान था।
बता दें कि इस क्षेत्र को हिल-स्टेशन के रूप में बदलने के लिए पांच पड़ोसी पहाड़ियों भंगोरा, बकरोटा, तेराह, पोटरिन और कथलगढ़ को चंबा के शासकों ने अधिग्रहित कर लिया गया था और इसके बाद यह जगह लोकप्रिय पहाड़ी पर्यटन स्थल बन गया। फिर साल 1861 में डलहौजी गुरदासपुर जिले का एक खास हिस्सा बन गया था। 1966 में जब से डलहौजी हिमाचल प्रदेश का एक हिस्सा बना है तब से यह दुनिया के एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में जाना- जानें लगा है।
डलहौजी हिमाचल प्रदेश की गोद में बसा एक छोटा सा शहर हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों के लिए स्वर्ग के सामान है। यह पुराने विश्व आकर्षण का प्रतीक है, जो अपने प्राकृतिक परिदृश्य, पाइन-क्लैड घाटियों, फूलों, घास के मैदान, तेज प्रवाह वाली नदियों, शानदार धुंध के पहाड़ से हर किसी को अपनी ओर खींचता है। यहां स्कॉटिश और विक्टोरियन वास्तुकला की हवा की महक और परिवेश आपको ब्रिटिश काल की याद दिलाएगा। डलहौज़ी हिमांचल प्रदेश की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली जगहों में से एक है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीन आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है। यह हिल स्टेशन गर्मियों के समय अंग्रेजों के सबसे पसंदीदा स्थानों में से एक था, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में राजसी विक्टोरियन शैली दिखाई देती है। डलहौजी देश के भीड़ वाले शहरों से दूर अपनी तरह का एक विचित्र शहर है जो आपको प्रकृति की गोद में होने का अनुभव करवाता है और एक प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करता है। अगर आप हिमाचल प्रदेश या इसके आसपास की जगहों की यात्रा करने जा रहे हैं तो आपको इस प्राकृतिक सुंदरता वाले शहर डलहौजी और इसके आसपास की जगहों की यात्रा जरुर करना चाहिए। डलहौजी शहर 1854 में वाइसराय- लॉर्ड डलहौजी द्वारा स्थापित किया गया था, जो अंग्रेजो की गर्मी से बचने की खास जगह थी। यहां की शांतिपूर्ण जलवायु और सुखद मौसम होने की जगह से यह अंग्रेजों के लिए छुट्टी का स्थान था। बता दें कि इस क्षेत्र को हिल-स्टेशन के रूप में बदलने के लिए पांच पड़ोसी पहाड़ियों भंगोरा, बकरोटा, तेराह, पोटरिन और कथलगढ़ को चंबा के शासकों ने अधिग्रहित कर लिया गया था और इसके बाद यह जगह लोकप्रिय पहाड़ी पर्यटन स्थल बन गया। फिर साल 1861 में डलहौजी गुरदासपुर जिले का एक खास हिस्सा बन गया था। 1966 में जब से डलहौजी हिमाचल प्रदेश का एक हिस्सा बना है तब से यह दुनिया के एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में जाना- जानें लगा है।




• खाज्जिअर ‘मिनी स्विट्जरलैंड’

खाज्जिअर डलहौज़ी के पास स्थित एक छोटा सा शहर है जिसको ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ या ‘भारत का स्विटज़रलैंड’ के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थान की खूबसूरती हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। 6,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित खाज्जिअर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुरम्य परिदृश्य की वजह से डलहौजी के पास घूमने की सबसे अच्छी जगहों में से एक हैं। खाज्जिअर एक छोटी झील के साथ एक पठार है जो पर्यटकों की सबसे पसंदिता जगहों में से एक है। इस जगह होने वाले साहसिक खेल ज़ोरबिंग, ट्रेकिंग आदि पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। सतधारा झरना चंबा घाटी में स्थित है,जो बर्फ से ढके पहाड़ों और ताज़े देवदार के पेड़ों के शानदार दृश्यों से घिरा हुआ है। ‘सतधारा’ का मतलब होता है सात झरने, इस झरने का नाम सातधारा सात खूबसूरत झरनों के जल के एक साथ मिलने की वजह से रखा गया है। इन झरनों का पानी समुद्र से 2036 मीटर ऊपर एक बिंदु पर मिलता है। यह जगह उन लोगों के लिए एक खास है जो शहर की भीड़-भाड़ वाली जिंदगी से दूर जाकर शांति का अनुभव करना चाहते हैं। सतधारा फाल्स अपने औषधीय गुणों की वजह से भी जानी जाती है क्योंकि यहां के पानी में अभ्रक पाया जाता है, जिसमें त्वचा के रोग ठीक करने के गुण होते हैं। अगर आप डलहौजी के पास घूमने की अच्छी जगह तलाश रहे हैं तो सतधारा फाल्स आपके लिए एक अच्छी जगह है। डलहौजी जाने के लिए सबसे अच्छा समय क्या है – डलहौजी अपनी आदर्श जलवायु की वजह से एक ऐसी जगह है, जहां आप पूरे वर्ष भर घूम सकते हैं। हालांकि, डलहौजी जाने का सबसे अच्छा समय मार्च-जून के बीच का होता है। मार्च और अप्रैल के महीनों में यहां पर बर्फ पिघलना शुरू हो जाती है और जब सूरज की किरणें बर्फ से ढके पहाड़ों और चरागाहों से टकराती है तब इस जगह की चमक देखने लायक होती है। इस समय यहां का मौसम बहुत सुहावना रहता है आप मार्च और अप्रैल में ठंड का अनुभव कर सकते हैं और जून के महीने में यहां का तापमान थोडा बढ़ने लगता है। गर्मियों के महीनों में भी डलहौजी का मौसम काफी अच्छा होता है, जिसकी वजह से यह प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के सामान है। मॉनसून भी यहां का मौसम सुहावना है क्योंकि मध्यम वर्षा से आपकी आपकी योजनाओं में कोई रुकावट नहीं आती। डलहौजी में सर्दियां साहसिक गतिविधियों के लिए एकदम सही हैं।
• डलहौजी तक कैसे पहुंचे
डलहौजी भारत में सबसे ज्यादा देखें जाने वाले हिल स्टेशनों में से एक है। यह हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में स्थित बहुत ही सुंदर जगह है जो यहां आने वाले पर्यटकों की यात्रा को यादगार बनती है। अगर आप डलहौजी जाने की योजना बना रहे हैं तो यहां हम डलहौज़ी पहुँचने के तरीकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
• हवाई जहाज से डलहौजी कैसे पहुंचे
हवाई जहाज से डलहौजी पहुंचने के लिए कांगड़ा में गग्गल हवाई अड्डा इसका सबसे निकटतम घरेलू हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा शहर से 13 किमी दूर है और यहां से डलहौजी हिल स्टेशन तक पहुंचने के लिए टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। इसके अलावा आप अन्य हवाई अड्डे चंडीगढ़ (255 किमी), अमृतसर (208 किमी) और जम्मू (200 किमी) के लिए भी उड़ान ले सकते हैं।
• रेलगाड़ी से डलहौजी कैसे पहुँचे
डलहौजी का सबसे निकटतम रेल स्टेशन पठानकोट है। जो इस पहाड़ी शहर से 80 किमी दूर स्थित है और भारत के विभिन्न शहरों, जैसे दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से कई ट्रेनों के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। पठानकोट रेलवे स्टेशन से डलहौजी पहुंचने के लिए आपको बाहर से टैक्सियाँ मिल जायेंगी।
• सड़क मार्ग से डलहौजी कैसे पहुंचे
डलहौजी सड़क मार्ग की मदद से आसपास के प्रमुख शहरों और जगहों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य बस सेवा और लक्जरी कोच डलहौजी को आसपास की सभी प्रमुख जगहों और शहरों से जोड़ते हैं। दिल्ली से डलहौजी के लिए रात भर लक्जरी बसें भी उपलब्ध हैं। इस मार्ग पर टैक्सी और निजी वाहन भी मिल जाते हैं।
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