मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का महत्व

मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का बहुत महत्व है।  स्वास्थ्य के बिना धन-संपत्ति मनोरंजन और अन्य सुविधाएं महत्वहीन है।





कहते हैं जो व्यक्ति तन व मन से स्वस्थ हैं वह संसार का सबसे सुखी प्राणी है। क्योंकि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन रहता है हमारे ऋषि-मुनियों ने शुरू से ही स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकार किया है और स्वस्थ रहने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन करने की सलाह दी है। जो मनुष्य सूर्योदय से पहले उठते हैं और अपने दिनचर्या पूर्ण करके निर्धारित समय के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते हैं, निष्काम भाव से कर्म करते हैं तथा रात्रि में समय पर शयन करते हैं, वह हमेशा स्वस्थ रहते हैं। स्वस्थ रहने का सबसे आसान मंत्र है प्रकृति के नियमों का पालन करना है। प्रकृति के नियमों का पालन कठोर शारीरिक परिश्रम और पौष्टिक आहार है। आप अपने दिनचर्या में ढेरों कार्य करते हैं, जीविका के लिए इधर से उधर भागदौड़ में लगे रहते हैं। लेकिन अपने शरीर जिससे आप इतना काम लेते हैं उस शरीर के लिए आप कुछ नहीं करते। इसलिए प्रकृति का एक और नियम भी है, आप खुद के लिए भी कुछ समय निकाले और गहन चिंतन से परे होकर शांत चित कहीं एकांत में बैठे। इससे आपके मन का संतुलन बनेगा और मन का संतुलन बनेगा तो आपका शरीर स्थिर होगा। समय निकालकर कुदरत के नजारों का भी आनंद लें जैसे पेड़-पौधों से मिलना, फूलों को देखना, जीवों व पंक्षियों को देखना।



वैसे हम जीव-जंतुओं से भी सीख सकते हैं। जीव-जंतु तो कुदरत पर निर्भर होते हैं या हम पर। वह कभी भी कुदरत के द्वारा प्रदान किए गए वस्तुओं का अपमान नहीं करते बल्कि उसे ग्रहण कर प्रकृति का धन्यवाद करते हैं।


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