क्या बिना पकाए शाकाहारी चीजें सेहत के लिए लाभदायक है?
यह इंटरव्यू मैं आपके साथ शेयर करता हूं लेकिन इससे संबंधित व्यक्ति का नाम गुप्त रखा गया है कारण उनकी यही इच्छा थी। वे अपनी लाइफ में बहुत ही कामयाब हैं। वे अपने अध्यात्मक गुरू से काफी प्रेरित हैं। उन्होंने कहा - हेल्थ संबंधी जो भी बातें गुरु जी ने बताई उसके बाद मुझे शाकाहारी खान-पान के बारे में काफी दिलचस्पी रहने लगी और मैंने इस बारे ढेर सारे किताबें पढ़ी और जब मुझे जरूरत महसूस हुई तो डायट संबंधी पूरी कोर्स भी कर ली जो मैं कुछ अंश आपके साथ शेयर कर रहा हूं :-
- अगर आप शाकाहारी चीजों को कच्चे ही खा जाते हैं तो इससे शरीर में कई पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। मेरी उम्र 40 साल है और मैं पेशे से सॉफ्टवेयर इंजी. हूं। मैं साउथ इंडियन के एक ब्राह्मण परिवार से विलांग करता हूं। हमारे परिवार में मांशाहार बिल्कुल वर्जित है। क्योंकि हमारे जो अध्यात्मिक गुरू हैं उन्होंने ऐसा करने के लिए हमारे परिवार को प्रेरित किया है। मेरा पूरा परिवार सिर्फ फल, हरी सब्जियां ही खाते हैं साथ में कोई मसाला वगैरह का भी इस्तेमाल नहीं करते। मेरे अध्यात्मिक गुरू ने स्वस्थ रहने के कुछ रहस्य के ऊपर प्रकाश डाला है उसी के बारे में आपको भी बताना चाहता हूं कि कच्ची चीजें भी कई बार हमारे शरीर से पोषक तत्व को सोख लेता है।
अगर आप नैचुरल डायट पर किसी भी तरह की रोक लगाते हैं तो उससे नुकसान ही है। जो लोग यह मानते हैं कि सब्जियों को और बाकी खाने वाली चीजों को बिना बकाए ही कच्चे खा लेना चाहिए उसके पीछे उनका तर्क होता है कि पकाने पर उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। हालांकि उन्हें नहीं पता कि ऐसे तो रॉ फूड के कई इंजाइम इंसान के पेट में अपने आप ही नष्ट हो जाता हैं। एक बारगी फलों और सब्जियों को तो कच्चे खाया भी जा सकता है लेकिन आप अनाज और बाकी चीजों को तो खा भी नहीं सकते क्योंकि इन्हें चबाना बहुत मुश्किल है। इसी तरह शाकाहारी या कच्चे शाकाहारी फल या सब्जी इनमें फोलिक एसिड की मात्रा कम होती है। एकशोध के मुताबिक फोलेट की कमी मुख्य रूप से उन लोगों को होती है जो फलीदार सब्जियों का सेवन कम करते हैं। वैसे भी इन फलीदार सब्जियों को कच्चा खाना बहुत मुश्किल होती है। इसके अलावा आपमें प्रोटीन की कमी भी हो सकती है क्योंकि दाल प्रोटीन के मुख्य स्रोत होते हैं और दालों को कच्चा खा पाना और भी ज्यादा मुश्किल है। इस समस्या से कैसे पार पाएं : इस परेशानी से बचने के लिए शाकाहारी लोगों को 200-300 मि.ग्राम इकोसेपेनटैनोइक एसिड और डोकोसहेक्सानोइक एसिड को सप्लीमेंट के रूप में खाना चाहिए। अगर आप शरीर में आयरन और जिंक की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं तो अपनी डायट में फर्मेंटेड फूड और स्प्राउट्स की मात्रा बढ़ा दें। इसी तरह अगर आप विटामिन डी और बी 12 की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं तो ऐसी शाकाहारी चीजों को शामिल करें जिसमें इन विटामिनकी मात्रा ज्यादा हो।
वैसे मेरा मानना है आप घर पर या बाहर हो भी खाते हैं वह संतुलित नहीं होता। हमें यह नहीं पता होता है क्या और कितना खाया जाए इसलिए अपने परिवार व बच्चों को किसी अच्छे डायटिशियन के पास ले जाएं और अपने खान-पान संबंधी जानकारी लें। ताकि आपको इस संबंधी अच्छी जानकारी हो और आपका पूरा परिवार एक बैलेंस डायट को इंजॉय कर सकें। एक जरूरी बात अपने किसी भी पसंद को अपने परिवार अथवा बच्चों पर जबरदस्ती ना थोंपें कि यह फलां चीज अच्छी यह खा या वह खा। ऐसा करने से न केवल आप उनकी आदतें खराब करते हैं बल्कि उनकी सेहत को भी जाने-अनजाने नुकसान पहुंचाते हैं। -यह इंटरव्यू आपको कैसा लगा इस संबंधी आप मुझे लिखे फीडबैक दें ताकि आपके मुताबिक जो आपको पसंद है वह लेख, और आपके सुझाए गए सब्जेक्ट पर लिख सकूं।



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