देव भूमि हरिद्वार व ऋषिकेश
आइए मेरे साथ देव भूमि हरिद्वार जहां की पावन धरती, पाप नाशनी गंगा पर्वतों को छोड़ धरती पर आती है। इस शहर की हवा में ही आस्था की खूशबू है। कलकल कर बहती गंगा, देश-विदेश से आए श्रद्धालु, जोर-जोर से आती आवाज गंगा मईया की जै। यह दृश्य शब्दों में बयान करना मुुश्किल हैै लेकिन अगर अनुभव करना हो तो आइए मेरे साथ कोशिश करता हूं आपको वहां तक पहुंचा सकूं...
ऋषिकेश :- देहरादून जिले का एक नगर, हिन्दू तीर्थस्थल, नगर निगम, तहसील भी है। यह गढ़वाल हिमाचल का प्रवेश द्वार भी है एवं यहां योग की वैश्विक राजधानी है। ऋषिकेश हरिद्वार से 25 किमीी उत्तर में तथा देहरादून से 43 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। ऋषिकेश पहुुंचकर गंगा पर्वतमालाओं को पीछे छोड़ समतल धरती की तरफ आगे बढ़ जाती है। यहां का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है। ऋषिकेश तीर्थस्थलों में से एक है। हिमालय की निचली पहाड़ियां और कुदरती सुन्दरता इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी इसे अतुल्य बनाती है। ऋषिकेश केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार है। कहा जाता है कि इस स्थान पर ध्यान लगाने से मोझ प्राप्त होता है। यह आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान व मन की शांति के लिए पहुंचते हैैं। विदेशी पर्यटक यहां आध्यात्मिक खोज में अक्सर आते रहते हैं। लक्ष्मण झूला, त्रेवेणी घाट, स्वर्ग आश्रम, नीलकंठ महादेव मंदिर, भरत मंदिर, कैलाश निकेतन मंदिर, वशिष्ट गुफा, गीता भवन यह कुछ दर्शनीय स्थल हैं।


ठहरने के लिए : यहां पर होटल, आश्रम आदि बड़े ही आसानी से मिल जाते हैं। इसलिए यहां आने वालों को किसी भी प्रकार की कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।











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